गोहिल राजवंश :::
द ग्रेट गंगाजलीया
गुहिलोत वंश का इतिहास और उनकी खापें(शाखाये)
===============================
गेहलोत / गोहिल / सिसोदिया क्षत्रिय भगवान राम के वंशज हैं। सूर्यवंश के आदि पुरुष की 65 वीं पीढ़ी में भगवान राम हुए 195 वीं पीढ़ी में वृहदंतक हुये। 125 वीं पीढ़ी में सुमित्र हुये। 155 वीं पीढ़ी अर्थात सुमित्र की 30 वीं पीढ़ी में गुहिल हुए जो गोहिल(गुहिल)/ गहलोत वंश की संस्थापक पुरुष कहलाये। गुहिल से कुछ पीढ़ी पहले कनकसेन हुए जिन्होंने सौराष्ट्र में सूर्यवंश के राज्य की स्थापना की। गुहिल का समय 566 ई. था। गुह्यदत्त(गुहिल) के वंश में बप्पा रावल(कालभोज) हुए, बप्पा रावल ने सन 734 ई० में मान मोरी(मौर्य) से चित्तौड की सत्ता छीन कर मेवाड में गुहिल/गहलौत वंश के शासक का सूत्रधार बनने का गौरव प्राप्त किया। इनका काल सन 734 ई० से 753 ई० तक था।
१. महाराजा गुहादित्य(गुहिल) --- गुहिल(गोहिल)/ गुहिलोत वंश के स्थापक (ई.स.566 - 586)
२. भोज (ई.स.586 - 606)
३. महेन्द्र - (प्रथम) (ई.स.606 - 626)
४. नागादित्य – नाग (ई.स.626 - 646)
५. शिलादित्य (ई.स.646 - 661)
६. अपराजित (ई.स.661 - 688)
७. महेन्द्र – (द्वीतीय) (ई.स.688 - 734)
८. कालभोज (बप्पा रावल) (ई.स.734 - 753)
(मेवाड राज्य के गोहिल/गहलौत शासन के सूत्रधार।)........................ 1) बाप्पा रावल के 12 वी पीढ़ी पुत्र शालिवाहन जी के पुत्रो का खैरगढ़ पर राज था और उनकी 27 वी पीढ़ी में सेजकजी हुए जो
खैरगढ़ से गुजरात गए वहा उनके वन्सज गोहिल कहलाये और भावनगर ,पालिताना आदि राज्य कायम किये ) 2) बाप्पा रावल के 26 वी पीढ़ी कर्ण सिंह से वागड़ क्षेत्र में डूंगरपुर बांसवाड़ा राज्य बने जो गहलोत वंश कहलाये 3) बाप्पा रावल के 34 वी पीढ़ी समर सिंह के एक पुत्र कुम्भकरण नेपाल चले वह नेपाल में अपना राज्य कायम किया वहां वे राणा वंश से विख्यात हुए 4) बाप्पा रावल के 36 वे पुत्र हमीर सिंह के बड़े पुत्र के नाम से सिसोदिया शाखा चली जिनका राज्य विश्व प्रशिद्ध मेवाड़ रहा 5) बाप्पा रावल के 36 वी पीढ़ी हमीर सिंह के छोटे पुत्र सज्जन सिंह जो दखन (महाराष्ट्र) चले गए उनके नाम से वह भोसले वंश चला सज्जन सिंह जी के चौथे पुत्र भोसजी के नाम से भोसले वंश चला जिनके कोल्हापुर ,मुधोल,सावंतवाड़ी,सातारा आदि राज्य थे (इसको लेकर अन्य जातिया विवादित रहती है पर महाराष्ट्र के भोंसले ,घोरपडे राजवंश खुद अपने को सिसोदिया मानते है और पूर्वज सज्जन सिंह को छत्रपति शिवजी के राजतिलक के समय राजतिलक करने वाले वाराणसी के पंडित गंगा भट्ट ये बात प्रमाणित कर चुके है)
खापें(शाखाये) व ठिकाने निम्नलिखित हैं।
----------------------------------------------
गुहिलोत वंश की खांपें
1 गुहिलोत (गुहिल\गोहिल\गहलोत)
2 असिल गुहिलोत
3 मांगलिया गुहिलोत
4 भटमेरा गुहिलोत
5 आहडि़या गुहिलोत
6 चन्द्रावत गुहिलोत
7 सिसोदिया गुहिलोत
8 लूणावत गुहिलोत
9 लखावत गुहिलोत
10 भाकरोत गुहिलोत
11 भंवरोत गुहिलोत
12 सलखावत गुहिलोत
13 सिकरावत गुहिलोत
14 चुण्डावत गुहिलोत (चुण्डावत गुहिलोत की 4 उपशाखाएँ )
15 सांरगदेवोत गुहिलोत
16 उदावत गुहिलोत
17 रूदावत गुहिलोत
18 गजसिंहोत गुहिलोत
19 दुल्हावत गुहिलोत
20 डूंगरसिंहोत गुहिलोत
21 भांडावत गुहिलोत
22 भीवावत गुहिलोत
23 खीवावत गुहिलोत (खीवावत गुहिलोत की 5 उपशाखाएँ )
24 सुवावत गुहिलोत
25 कीतावत गुहिलोत
26 अढुओत गुहिलोत
27 गढुओत गुहिलोत
28 नाथावत गुहिलोत
29 वीरमदेवोत गुहिलोत
30 कुम्भावत गुहिलोत
31 नागावत गुहिलोत
32 किशनावत गुहिलोत
33 जगमालोत गुहिलोत
34 कान्हावत गुहिलोत
35 जैतसिंहोत गुहिलोत
36 रायसिंहोत गुहिलोत
37 सगरावत गुहिलोत
38 अगरावत गुहिलोत
39 सिंहावत गुहिलोत
40 पंचाणोत गुहिलोत
41 सुरताणोत गुहिलोत
42 लुणकरोत गुहिलोत
43 माछलोत गुहिलोत
44 महेश दासोत गुहिलोत
45 रूद्रोत गुहिलोत
46 नगराजोत गुहिलोत
47 शाक्तावत गुहिलोत (शाक्तावत गुहिलोत की 3 उपशाखाएँ )
48 सोजावत गुहिलोत
49 मांझावत गुहिलोत
50 राणावत गुहिलोत (राणावत गुहिलोत की 7 उपशाखाएँ )
(चुण्डावत गुहिलोत की 4 उपशाखाएँ )
1 कृष्णावत चुण्डावत
2 जगावत चुण्डावत
3 सांगावत चुण्डावत
4 खंगारोत चुण्डावत
(खीवावत गुहिलोत की 5 उपशाखाएँ )
1 सहसमलोत खीवावत
2 रणमलोत खीवावत
3 खानावत खीवावत
4 रामावत खीवावत
5 सिंधावत खीवावत
(शाक्तावत गुहिलोत की 3 उपशाखाएँ )
1 भाणावत शाक्तावत
2 गोकुलदासोत शाक्तावत
3 केसरी सिंगोत शाक्तावत
(राणावत गुहिलोत की 7 उपशाखाएँ )
1 पुरावत राणावत
2 गरीबदासोत राणावत
3 जयसिंहोत राणावत
4 संग्रामसिंहोत राणावत
5 महथाना संग्रामसिंहोत राणावत
6 चमियाल संग्रामसिंहोत राणावत
7 मडियार संग्रामसिंहोत राणावत
जय एकलिंगजी नाथ.... जय मेवाड़ .
द ग्रेट गंगाजलीया
गुहिलोत वंश का इतिहास और उनकी खापें(शाखाये)
===============================
गेहलोत / गोहिल / सिसोदिया क्षत्रिय भगवान राम के वंशज हैं। सूर्यवंश के आदि पुरुष की 65 वीं पीढ़ी में भगवान राम हुए 195 वीं पीढ़ी में वृहदंतक हुये। 125 वीं पीढ़ी में सुमित्र हुये। 155 वीं पीढ़ी अर्थात सुमित्र की 30 वीं पीढ़ी में गुहिल हुए जो गोहिल(गुहिल)/ गहलोत वंश की संस्थापक पुरुष कहलाये। गुहिल से कुछ पीढ़ी पहले कनकसेन हुए जिन्होंने सौराष्ट्र में सूर्यवंश के राज्य की स्थापना की। गुहिल का समय 566 ई. था। गुह्यदत्त(गुहिल) के वंश में बप्पा रावल(कालभोज) हुए, बप्पा रावल ने सन 734 ई० में मान मोरी(मौर्य) से चित्तौड की सत्ता छीन कर मेवाड में गुहिल/गहलौत वंश के शासक का सूत्रधार बनने का गौरव प्राप्त किया। इनका काल सन 734 ई० से 753 ई० तक था।
१. महाराजा गुहादित्य(गुहिल) --- गुहिल(गोहिल)/ गुहिलोत वंश के स्थापक (ई.स.566 - 586)
२. भोज (ई.स.586 - 606)
३. महेन्द्र - (प्रथम) (ई.स.606 - 626)
४. नागादित्य – नाग (ई.स.626 - 646)
५. शिलादित्य (ई.स.646 - 661)
६. अपराजित (ई.स.661 - 688)
७. महेन्द्र – (द्वीतीय) (ई.स.688 - 734)
८. कालभोज (बप्पा रावल) (ई.स.734 - 753)
(मेवाड राज्य के गोहिल/गहलौत शासन के सूत्रधार।)........................ 1) बाप्पा रावल के 12 वी पीढ़ी पुत्र शालिवाहन जी के पुत्रो का खैरगढ़ पर राज था और उनकी 27 वी पीढ़ी में सेजकजी हुए जो
खैरगढ़ से गुजरात गए वहा उनके वन्सज गोहिल कहलाये और भावनगर ,पालिताना आदि राज्य कायम किये ) 2) बाप्पा रावल के 26 वी पीढ़ी कर्ण सिंह से वागड़ क्षेत्र में डूंगरपुर बांसवाड़ा राज्य बने जो गहलोत वंश कहलाये 3) बाप्पा रावल के 34 वी पीढ़ी समर सिंह के एक पुत्र कुम्भकरण नेपाल चले वह नेपाल में अपना राज्य कायम किया वहां वे राणा वंश से विख्यात हुए 4) बाप्पा रावल के 36 वे पुत्र हमीर सिंह के बड़े पुत्र के नाम से सिसोदिया शाखा चली जिनका राज्य विश्व प्रशिद्ध मेवाड़ रहा 5) बाप्पा रावल के 36 वी पीढ़ी हमीर सिंह के छोटे पुत्र सज्जन सिंह जो दखन (महाराष्ट्र) चले गए उनके नाम से वह भोसले वंश चला सज्जन सिंह जी के चौथे पुत्र भोसजी के नाम से भोसले वंश चला जिनके कोल्हापुर ,मुधोल,सावंतवाड़ी,सातारा आदि राज्य थे (इसको लेकर अन्य जातिया विवादित रहती है पर महाराष्ट्र के भोंसले ,घोरपडे राजवंश खुद अपने को सिसोदिया मानते है और पूर्वज सज्जन सिंह को छत्रपति शिवजी के राजतिलक के समय राजतिलक करने वाले वाराणसी के पंडित गंगा भट्ट ये बात प्रमाणित कर चुके है)
खापें(शाखाये) व ठिकाने निम्नलिखित हैं।
----------------------------------------------
गुहिलोत वंश की खांपें
1 गुहिलोत (गुहिल\गोहिल\गहलोत)
2 असिल गुहिलोत
3 मांगलिया गुहिलोत
4 भटमेरा गुहिलोत
5 आहडि़या गुहिलोत
6 चन्द्रावत गुहिलोत
7 सिसोदिया गुहिलोत
8 लूणावत गुहिलोत
9 लखावत गुहिलोत
10 भाकरोत गुहिलोत
11 भंवरोत गुहिलोत
12 सलखावत गुहिलोत
13 सिकरावत गुहिलोत
14 चुण्डावत गुहिलोत (चुण्डावत गुहिलोत की 4 उपशाखाएँ )
15 सांरगदेवोत गुहिलोत
16 उदावत गुहिलोत
17 रूदावत गुहिलोत
18 गजसिंहोत गुहिलोत
19 दुल्हावत गुहिलोत
20 डूंगरसिंहोत गुहिलोत
21 भांडावत गुहिलोत
22 भीवावत गुहिलोत
23 खीवावत गुहिलोत (खीवावत गुहिलोत की 5 उपशाखाएँ )
24 सुवावत गुहिलोत
25 कीतावत गुहिलोत
26 अढुओत गुहिलोत
27 गढुओत गुहिलोत
28 नाथावत गुहिलोत
29 वीरमदेवोत गुहिलोत
30 कुम्भावत गुहिलोत
31 नागावत गुहिलोत
32 किशनावत गुहिलोत
33 जगमालोत गुहिलोत
34 कान्हावत गुहिलोत
35 जैतसिंहोत गुहिलोत
36 रायसिंहोत गुहिलोत
37 सगरावत गुहिलोत
38 अगरावत गुहिलोत
39 सिंहावत गुहिलोत
40 पंचाणोत गुहिलोत
41 सुरताणोत गुहिलोत
42 लुणकरोत गुहिलोत
43 माछलोत गुहिलोत
44 महेश दासोत गुहिलोत
45 रूद्रोत गुहिलोत
46 नगराजोत गुहिलोत
47 शाक्तावत गुहिलोत (शाक्तावत गुहिलोत की 3 उपशाखाएँ )
48 सोजावत गुहिलोत
49 मांझावत गुहिलोत
50 राणावत गुहिलोत (राणावत गुहिलोत की 7 उपशाखाएँ )
(चुण्डावत गुहिलोत की 4 उपशाखाएँ )
1 कृष्णावत चुण्डावत
2 जगावत चुण्डावत
3 सांगावत चुण्डावत
4 खंगारोत चुण्डावत
(खीवावत गुहिलोत की 5 उपशाखाएँ )
1 सहसमलोत खीवावत
2 रणमलोत खीवावत
3 खानावत खीवावत
4 रामावत खीवावत
5 सिंधावत खीवावत
(शाक्तावत गुहिलोत की 3 उपशाखाएँ )
1 भाणावत शाक्तावत
2 गोकुलदासोत शाक्तावत
3 केसरी सिंगोत शाक्तावत
(राणावत गुहिलोत की 7 उपशाखाएँ )
1 पुरावत राणावत
2 गरीबदासोत राणावत
3 जयसिंहोत राणावत
4 संग्रामसिंहोत राणावत
5 महथाना संग्रामसिंहोत राणावत
6 चमियाल संग्रामसिंहोत राणावत
7 मडियार संग्रामसिंहोत राणावत
जय एकलिंगजी नाथ.... जय मेवाड़ .

